गति और प्रचलन (movement and Locomotion)

 1.गति और प्रचलन की परिभाषा  लिखों?

उत्तर-  गति (movement):-एक स्थान पर स्थिर रहकर सजीव किसी उद्दीपन के प्रभाव से या स्वयं शरीर संचालन करे तो इसे गति कहते हैं।

• प्रचलन:- जिस प्रकिया में सजीव स्वयं या किसी उद्दीपन के प्रभाव में स्थान परिवर्तन करें तो इसे प्रचलन कहते हैं।

2.गति एवं प्रचलन में अन्तर लिखों?

उत्तर- गति और प्रचलन में अन्तर

     गति                                                प्रचलन

१. इसमें सजीव का स्थान        १. इसमें सजीव का स्थान        

     परिवर्तन नहीं होता हैं।                  परिवर्तन होता हैं।

२.गति होने पर प्रचलन होगा।     २. प्रचलन होने पर गति

यह आवश्यक नहीं है।                   अवश्य होगा।


3.गति एवं प्रचलन का उद्देश्य क्या है?  

उत्तर:- गति व प्रचलन का उद्देश्य:

खाद्य संग्रह:- उदभिजो को छोड़कर सभी प्राणी भोजनसंग्रह के लिए प्रचलन करते हैं।

आत्मरक्षा:- सजीव अपनी रक्षा करने के लिए भी प्रचलन करते हैं। जैसे:- शत्रु के आक्रमण से रक्षा, प्राकृतिक आपदा से रक्षा।

प्रजनन:- वंश वृद्धि के लिए जन्तु वातावरण परिवर्तन करते हैं। प्रजनन के लिए सभी जंतुओं में प्रचलन होता हैं बिना गति व प्रचलन के पुरुष व स्त्री जननांग को मिलना सम्भव नहीं होगा।

4.गति कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर:- गति तीन प्रकार के होते हैं-

१.अनुचलन गति( Tactic Movement)

२. अनुवर्तन गति( Tropic Movement

३. अनुकुंचन गति( Nastic Movement)

5. अनुचलन  गति कि परिभाषा दो? ये कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर:- अनुचलन गति:- बाहरी उद्दीपन के प्रभाव से जब किसी पोधे में स्थान स्थान परिवर्तन हो तो इसे टैक्टिक गति कहते हैं। 

यह तीन प्रकार के होते हैं:-

१. प्रकाश प्रेरण गति ( phototactic movement)

२. रसायन प्रेरण गति ( chemotactic Movement)

३. ऊष्मा प्रेरण गति  ( thermotatic movement)


• प्रकाश प्रेरण गति:- प्रकाश उद्दीपक के प्रभाव से जब पोधै स्थान परिवर्तन करते हैं तो इसे तो इसे प्रकाश प्रेरण गति कहते हैं। जैसे:-volvox ,   क्लाईमाडोमोनस प्रकाश की ओर गमन करते हैं।


• रसायन प्रेरण गति:- रसायनिक पदार्थ के प्रभाव से पोधें में स्थान परिवर्तन होता हो तो इसे रसायन प्रेरण गति कहते हैं।

जैसे:- टेरिस,  ड्योप्टेरिस इत्यादि फर्न जातीय पौधे के शुक्राणु गर्भ केसर की ओर गमन करते है।


उष्म प्रेरण गति:- ताप उद्दीपक के प्रभाव से पौधे में स्थान परिवर्तन हो तो इसे उष्म प्रेरण गति कहते हैं। जैसे:- क्लेमाइडोमोनस गर्म जल से ठंडे जल की ओर गमन करता है।

6. अनुवर्तन गति की परिभाषा दो? ये कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर:- अनुवर्तन गति:- पौधे के मूल , काण्ड, पत्ते आदि में वृद्धि के कारण या उद्दीपक के कारण संपन्न होने वाले गति ही अनुवर्तन गति कहलाता है।इस पर उदीपक का दिशा का प्रभाव पड़ता है।

 अनुवर्तन गति तीन प्रकार के होते हैं:-

 १.फोटोट्रोपिक गति ( phototropic movement)

२.  जिययोट्रोपिक गति ( Geotropic movement)

३.  हाईड्रोट्रोपिक गति (Hydrotropic movement)


*Phototrophic Movement:-पौधे के गति पर जब प्रकाश की दिशा का प्रभाव पड़ता है तो इसे फोटो ट्रोपिक गति कहते हैं। जैसे पौधे के पत्ते प्रकाश की दिशा में बढ़ते हैं।इसे positive phototropism कहते हैं। पौधे की जड़ की जड़ का प्रकाश की विपरीत दिशा में बढ़ना negative phototropism कहलाता है।


**Geotropic movement:- पौधे के गति पर गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव पड़ता है।इस प्रकार के गति को जियोट्रोपिक गति कहते हैं। जैसे पौधे का जड़ गुरुत्वाकर्षण की दिशा में बढ़ता है इसे positive geotropism कहते हैं। पौधे का शीर्ष गुरुत्वाकर्षण के विपरीत दिशा में बढ़ता है इसे negative geotropism कहते हैं।


*** Hydrotropic movement:-जल के प्रभाव से पौधे में होने वाले गति हाइड्रोट्रोपिक गति कहलाता है। जैसे

पौधे की जड़ का जल की दिशा में वृद्धि करना positive hydropism हैं लेकिन शीर्ष का  जल  के विपरीत दिशा में negative hydrotropism हैं।

7. अनुकुंचन गति किसे कहते हैं और ये कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर- अनुकुंचन गति:- पौधे के जिस गति पर उद्दीपक की तीव्रता का प्रभाव पड़ता है उसे अनुकुंचन गति कहते हैं।

ये पांच प्रकार के होते हैं:-

१. फोटोनैस्टी (Photonasty)

२. थर्मो नैस्टी (Thermonasty

३. निक्टिनैस्टी ( Nictinasty)

४ कैमोनैस्टी   ( chemonasty)

५. सिसमोनैस्टी ( seismonasty)


१ * फोटोनैस्टी (Photonasty):- प्रकाश की तिव्रता से पौधे में होने वाला गति फोटोनैस्टी कहलाता है। जैसे:- कमल तथा सूर्यमुखि प्रकाश की तिव्रता में दिन में खिलते हैं एवं शाम में प्रकाश की तिव्रता घटने पर मुरझा जाते हैं।

२* थर्मोनैस्टी (Thermonasty):-जिस गति पर तापमान की तीव्रता का प्रभाव पड़ता है उसे थर्मो नैस्टी कहते हैं। जैसे :- जैसे:- ट्यूलिप का फुल  अधिक तापमान पर खिलते हैं।

३* निक्टिनैस्टी(Nictinasty):- प्रकाश तथा तापमान दोनों की तीव्रता के प्रभाव से होने वाला गति निक्टिनैस्टी कहलाता है। जैसे:- बबूल , शिरीष आदि के पत्ते दिन में प्रकाश तथा तापमान अधिक होने पर खुल जाते और रात में बंद हो जातें हैं।

४* किमोनैस्टी(chemonasty):- किसी रासायनिक पदार्थ के स्पर्श में आने पर पौधे में जो गति होता है उसे किमोनैस्टी कहते हैं। जैसे sundew नामक पौधे के पत्ते पर कीट-पतंग बैठने से प्रोटीन का स्पर्श पाकर पत्ते बंद हो जातें हैं।

५* सिस्मोनैस्टी(siesmonasty):- स्पर्श या आघात के कारण होने वाले गति सिस्मोनैसटी कहलाता है। जैसे - लज्जावति के पत्तो को स्पर्श करने पर  वे बंद हो जातें हैं।

 


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